Description
वास्तु शास्त्र का परिचय — इसका आधार, महत्व, परंपरा और सामान्य भ्रांतियाँ
आठ दिशाएँ और उनके देवता — पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और चार उपदिशाएँ
पंचतत्व — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का दिशाओं से संबंध
वास्तु पुरुष मंडल, 16 जोन और ब्रह्मस्थान — स्थान-नियोजन की मूल अवधारणाएँ
भूमि-चयन और भूमि-परीक्षण — आकार, ढलान, मिट्टी और आसपास की स्थिति
घर के विभिन्न कक्षों का वास्तु — रसोई, शयनकक्ष, पूजा स्थान, शौचालय, जल स्रोत, सीढ़ियाँ, तिजोरी और अध्ययन कक्ष
कार्यालय और व्यापार स्थल का वास्तु — प्रवेश द्वार, प्रबंधक की स्थिति, बैठक कक्ष, तिजोरी और भंडारण
12-चरणीय वास्तु जाँच विधि — नक्शा बनाने से लेकर संतुलित निष्कर्ष तक
शुरुआती लोगों की 12 सामान्य गलतियाँ और उनसे बचाव
13 निर्देशित वर्कशीट — भवन की मूल जानकारी, दिशा-पुष्टि, 16 जोन, ब्रह्मस्थान, मुख्य द्वार, रसोई, शयनकक्ष, पूजा स्थान, शौचालय, जल-ताप स्रोत, सीढ़ियाँ, दोष-सूची और सुधार योजना
5 प्रारंभिक अभ्यास, 3 मध्यवर्ती अभ्यास और 3 विस्तृत केस स्टडी
6 चेकलिस्ट — मुख्य वास्तु, गृह प्रवेश, निर्माण पूर्व, कार्यालय, दैनिक अभ्यास और नैतिकता
30-दिवसीय कार्य योजना — चार सप्ताह में क्रमबद्ध सीखने की योजना
त्वरित संदर्भ तालिकाएँ और “करें-न करें” सूची
यह पुस्तक किनके लिए है:
जो वास्तु शास्त्र बिल्कुल शुरुआत से सीखना चाहते हैं
जो पहले से थोड़ा जानते हैं, पर व्यवस्थित ढंग से सीखना चाहते हैं
जो अपने घर या कार्यालय का वास्तु स्वयं जाँचना चाहते हैं
जो गृह-निर्माण या गृह-प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं
जो वास्तु को शौक या गंभीर अध्ययन के रूप में लेना चाहते हैं
जो अंधविश्वास और तर्कसंगत व्याख्या में अंतर करना चाहते हैं
पुस्तक की विशेषताएँ:
व्यावहारिक दृष्टिकोण — हर अवधारणा के बाद उदाहरण और अभ्यास
कार्यपुस्तिका स्वरूप — 13 भरने योग्य वर्कशीट
चेकलिस्ट — 6 त्वरित जाँच-सूचियाँ
केस स्टडी — विस्तृत विश्लेषण सहित अभ्यास उदाहरण
कार्य योजना — पूरी 30-दिवसीय चरणबद्ध योजना
संदर्भ सामग्री — तालिकाएँ, सारांश, त्वरित संदर्भ
- लेखक: Anadinath Dubey
महत्वपूर्ण अस्वीकरण:
यह पुस्तक केवल सामान्य शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। वास्तु शास्त्र एक व्याख्या-आधारित परंपरा है, जिसमें अलग-अलग विद्वानों और पद्धतियों के अनुसार अंतर हो सकता है। भवन-निर्माण, संरचनात्मक बदलाव, बिजली-पानी की व्यवस्था, स्वास्थ्य, कानूनी या वित्तीय निर्णयों के लिए संबंधित योग्य पेशेवर — जैसे अभियंता, स्थापत्य विशेषज्ञ, चिकित्सक या वित्तीय सलाहकार — से परामर्श अवश्य लें। वास्तु को किसी भी समस्या का एकमात्र समाधान न मानें







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